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इति श्वनोपनिषदि प्रथमः संवादः।

 श्वान कहता है—

"मनुष्य!
मुझे देखकर दया मत करो।
पहले अपने भीतर की बेचैनी को देखो।
मैं सड़क पर होकर भी शांत हूँ,
तुम महलों में होकर भी अशांत हो।"

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श्वनोपनिषद् - मंगलाचरण

मंगलाचरण नमः उस सत्य को जो सब प्राणियों में समान रूप से व्याप्त है। नमः उस चेतना को जो राजा और रंक, मनुष्य और श्वान, सभी में एक ही प्रकाश से प्रकाशित है।