मंगलाचरण
नमः उस सत्य को जो सब प्राणियों में समान रूप से व्याप्त है।
नमः उस चेतना को जो राजा और रंक, मनुष्य और श्वान, सभी में एक ही प्रकाश से प्रकाशित है।
Disclaimer : यदि श्वनोपनिषद् को देखकर या पढ़कर आपके भीतर क्रोध, आक्रोश या विरोध की भावना उत्पन्न होती है, तो उन भावनाओं की सम्पूर्ण जिम्मेदारी आपकी स्वयं की होगी। इस रचना का उद्देश्य किसी व्यक्ति, समुदाय, धर्म, परम्परा या आस्था की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है। 🐕📜
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