श्वान कहता है— "मनुष्य! मुझे देखकर दया मत करो। पहले अपने भीतर की बेचैनी को देखो। मैं सड़क पर होकर भी शांत हूँ, तुम महलों में होकर भी अशांत हो।"
कबीर कुत्ता राम का, मुतिया मेरा नाँव। गले राम की जेवड़ी, जित खींचे तित जाऊँ॥
Disclaimer : यदि श्वनोपनिषद् को देखकर या पढ़कर आपके भीतर क्रोध, आक्रोश या विरोध की भावना उत्पन्न होती है, तो उन भावनाओं की सम्पूर्ण जिम्मेदारी आपकी स्वयं की होगी। इस रचना का उद्देश्य किसी व्यक्ति, समुदाय, धर्म, परम्परा या आस्था की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है। 🐕📜