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प्रथम विचार : श्वान-दृष्टि

 

मनुष्य स्वयं को बुद्धिमान कहता है,
पर श्वान उसे देखकर मुस्कुराता है।

श्वान कहता है—

"मैं भूखा होता हूँ तो भोजन खोजता हूँ।
तृप्त होता हूँ तो विश्राम करता हूँ।
किन्तु मनुष्य तृप्त होकर भी संग्रह करता है,
और संग्रह करके भी भयभीत रहता है।"

श्वान वर्तमान में जीता है,
मनुष्य भविष्य की कल्पनाओं और अतीत की स्मृतियों में भटकता है।

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